World Tribal Day: आदिवासी संस्कृति का उत्सव, युवाओं के संघर्ष का प्रेरणा स्रोत

Raja Shantanu
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World Tribal Day: आदिवासी संस्कृति का उत्सव, युवाओं के संघर्ष का प्रेरणा स्रोत

World Tribal Day: भारत संस्कृति, परंपराओं, जाति और पंथ में विविधता वाला देश है। विश्व आदिवासी दिवस, जिसे वर्ल्ड ट्राइबल डे भी कहा जाता है, हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है, ताकि आदिवासी आबादी के अधिकारों की रक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। इस दिन का उद्देश्य आदिवासी आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके योगदान को मान्यता देना है।

World Tribal Day: आदिवासी आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाना उद्देश्य

विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य आदिवासी आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है। यह दिन विश्वभर में आदिवासी समुदाय के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए एक अदर्श अवसर है। आदिवासी लोग दुनिया के सभी क्षेत्रों में रहते हैं और उनका महत्वपूर्ण योगदान भी दुनिया की सांस्कृतिक विविधता में होता है।

World Tribal Day: विश्व आदिवासी दिवस का इतिहास

विश्व आदिवासी दिवस का पहला आयोजन 1994 में हुआ था, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व के आदिवासी लोगों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा के लिए इसे मनाने का निर्णय लिया। यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार, आदिवासी लोग दुनिया के 22% क्षेत्र पर कब्जा करते हैं और उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

World Tribal Day: विश्व आदिवासी दिवस का थीम 2023: आत्मनिर्णय के लिए परिवर्तन के प्रेरक के रूप में आदिवासी युवा

विश्व आदिवासी दिवस 2023 का थीम “आत्मनिर्णय के लिए परिवर्तन के प्रेरक के रूप में आदिवासी युवा” है। आज के आदिवासी युवा अपने आत्मनिर्णय के अधिकार का प्रयोग सक्रिय तौर पर कर रहे हैं और पारंपरिक संस्कृति के विरासत को अग्रसर कर रहे हैं। उनका योगदान मानवता के सामने उभरती समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत है।

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